अरे यह क्या किया नादान

राग : सोरठ

अरे यह क्या किया नादान, तेरी क्या समझपे पड़ गई धूल ॥टेक॥

आंब हेत ते बाग लगायो, बो दिये पेड़ बम्बूल ।

अरे फल चाखेगा रोवेगा, क्या रहा है मन में फूल ॥

अरे यह क्या किया नादान, तेरी क्या समझपे पड़ गई धूल ॥१॥

हाथ सुमरनी बाँह कतरनी निज पद को गया भूल ।

मिथ्यादर्शन ज्ञान लिया रहा, समकित से प्रतिकूल ॥

अरे यह क्या किया नादान, तेरी क्या समझपे पड़ गई धूल ॥२॥

कंचन भाजन कीच उठाया, भरी रजाई शूल ।

'न्यामत' सौदा ऐसा किया जामें, ब्याज रहा नहीं मूल ॥

अरे यह क्या किया नादान, तेरी क्या समझपे पड़ गई धूल ॥३॥

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