Text Bhajan
लागे सत्य सुमन
साँवरे बनवासी काहे छोड
लहराएगा लहराएगा झंडा
प्राणां सूं भी प्यारी
मूंजी धरी रहेली
संसार महा अघसागर
आओ सत्य धरम
मानी थारा मान
मानी मनुआ मद
मेरे भगवन यह क्या हो गया
मेरे मन मन्दिर में आन
म्हानै पतो बताद्यो थाँसू
भाया थारी बावली जवानी
दुःख मेटो वीर
बिन ज्ञान जिया तो जीना
क्षमाशील सो धर्म
भव भव रुले हैं
नमेँ मात वामा के पारस
नेमी जिनेश्वरजी काहे कसूर
बधाई आज मिल गाओ
त्याग बिना जीवन की गाड़ी
दया कर दो मेरे स्वामी तेरे
धन्य धन्य आज घडी
धोली हो गई रे काली कामली
ध्यान धर ले प्रभू को
नचा मन मोर ठौर
जो आज दिन है वो
ज्यों सरवर में रमै माछली
तप बिन नीर न बरसे
तेरी कहाँ गई मतिमारी
कलश देखने आया जी
कहा मानले ओ मेरे भैया
किये भव भव भव में फेरे
कोई जब साथ न आये
करल्यो क्षमा धरम न धारण
अध्यात्म के शिखर पर
अय नाथ ना बिसराना आये
आयो आयो पर्व अठाई
काहे पाप करे काहे छल
चार दिनां को जीवन मेलो
ओ वीर जिन जी तुम्हें हम
विषय भोग में तूने ऐ जिया
विषय सेवन में कोई
भ्रात ऐसी खेलिये
भगवन मरुदेवी के लाल
मत तोरे मेरे शील का सिंगार
चेतो चेतोरे चेतनवा
दया दिल में धारो प्यारे
परदेसिया में कौन चलेगो
अरे यह क्या किया नादान