नचा मन मोर ठौर

तर्ज -- घटा घन घोर घोर- फिल्म : तानसेन

नचा मन मोर – 2, ठौर न पाई और,

तोरे भुवन आया आया तोरे भुवन आया ॥

एक गांव का जो है स्वामी, वह दुखिया दुख खोवे,

तीन लोकपति दुख हरे नहीं, अनहोनी कब होवे

बड़ा ललचायाजी, बड़ा ललचायाजी,

कर्मों ने लाला नया दर्श दिखलाया ॥१॥

दीनानाथ दया के सागर झोली पलक पसारें,

दर्शन को 'सौभाग्य' खड़ा है कब से तोरे द्वारे ।

जरा अपनाओजी जरा अपनाओं जी,

तेरे पे आश धरें हिये उमगाया ॥2॥

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