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चिद्रूप हमारा इसका
रचना : मनोहर वर्णी
भैया मेरे नरभव विषयों
भाग्य बिना कछु हाथ न आवे
तर्ज : मत्तगयंद सवैया
अमृतझर झुरि झुरि आवे
तर्ज : जीव तू भ्रमत सदीव अकेला
इक योगी असन बनावे
ऐसो नरभव पाय गंवायो
ॐ
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