Pandit Bhagchand
सुमर सदा मन आतमराम
राग : बिलावल, रघुपति राघव राजाराम
जे सहज होरी के
यही इक धर्ममूल है
तर्ज : दुविधा कब जै है या मन की
श्री मुनि राजत समता संग
राग : सारंग, रघुपति राघव राजाराम
सन्त निरन्तर चिन्तत
महिमा है अगम
मान न कीजिये हो
राग : मल्हार
यह मोह उदय दुख पावै
राग दीपचन्दी
ज्ञानी जीवनि के भय होय
धनि ते प्रानि जिनके
राग : दादरा
धन्य धन्य है घड़ी आज
परणति सब जीवन
तर्ज : सांची तो गंगा यह
प्रभु पै यह वरदान
ऐसे साधु सुगुरु कब
राग : कलिगड़ा
जीव! तू भ्रमत सदैव
जीवन के परिनामनि की
राग : ठुमरी
जे दिन तुम विवेक बिन
आकुल रहित होय इमि
तर्ज : प्यार में होता है क्या जादू
आतम अनुभव आवै
आवै न भोगन में तोहि
ॐ
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