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श्री मुनि राजत समता संग
राग : सारंग, रघुपति राघव राजाराम
संत साधु बन के विचरूँ
सिद्धों की श्रेणी में आने वाला
हे परम दिगम्बर यति
है परम दिगम्बर मुद्रा जिनकी
होली खेलें मुनिराज शिखर
मुनिवर को आहार
मैं परम दिगम्बर साधु
मोक्ष के प्रेमी हमने
म्हारा परम दिगम्बर मुनिवर
वनवासी सन्तों को नित ही
वेष दिगम्बर धार
शान्ति सुधा बरसा गये
मुनिवर आज मेरी कुटिया में
धन्य मुनीश्वर आतम हित में
नित उठ ध्याऊँ गुण गाऊँ
निर्ग्रंथों का मार्ग
परम गुरु बरसत ज्ञान झरी
राग : मल्हार
परम दिगम्बर मुनिवर देखे
गुरु रत्नत्रय के धारी
तर्ज : सूरज कब दूर गगन
गुरुवर तुम बिन कौन
धनि हैं मुनि निज आतमहित
धन्य धन्य हे गुरु गौतम
ऐसा योगी क्यों न अभयपद
ऐसे मुनिवर देखें
ऐसे साधु सुगुरु कब
राग : कलिगड़ा
कबधौं मिलै मोहि श्रीगुरु
कैसा अद्भुत शान्त स्वरूप
गुरु निर्ग्रन्थ परिग्रह त्यागी
ॐ
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