Kalyanak
सुरपति ले अपने शीश
स्वागत करते आज तुम्हारा
तर्ज :- चूड़ी जो खनकी हाथों में
हो संसार लगने लगा अब
तर्ज : चलो रे डोली उठाओ
विषयों की तृष्णा को छोड
महावीरा झूले पलना
माता थारी परिणति तत्त्वमयी
मेरा पलने में
म्हारे आंगण आज आई
रोम रोम में नेमिकुंवर के
लिया प्रभू अवतार जयजयकार
छायो रे छायो आनंद
जनम लिया है महावीर
तर्ज : आओ बच्चों तुम्हें सुनाएँ
जहाँ महावीर ने जन्म
तर्ज : है प्रीत जहां की रीत सदा
दिव्य ध्वनि वीरा
देखा मैंने त्रिशला का
बाजे कुण्डलपुर में
मणियों के पलने में
मेरे महावीर झूले पलना
कुण्डलपुर में वीर हैं
आज जन्मे हैं तीर्थंकर
आनंद अंतर मा आज
झूल रहा पलने में
तर्ज: चाँद जैसे मुखड़े पे बिंदिया
बाजे कुण्डलपुर में बधाई
मंगल ये अवसर आंगण
मणियों के पलने में स्वामी
नाचे रे इन्दर देव
गिरनारी पर तप
जूनागढ़ में सज
पंखिडा रे उड के आओ
रोम रोम में नेमि
विषयों की तृष्णा
पंखिड़ा तू उड़ के जाना स्वर्ग
तेरे पांच हुये कल्याण प्रभु
दिन आयो दिन आयो
दिव्य ध्वनि वीरा खिराई
जागो जी माता जागन घड़ियाँ
झुलाय दइयो पलना
उड़ उड़ रे म्हारी ज्ञान चुनरियाँ
कल्पद्रुम यह समवसरण है
गर्भ कल्याणक आ गया
गिरनारी पर तप कल्याणक
घर घर आनंद छायो
छायो रे छायो आनंद छायो
आज तो बधाई
आया पंच कल्याणक महान 2
आया पंच कल्याणक महान
आयो आयो पंचकल्याणक भविजन
इन्द्र नाचे तेरी भक्ति में
आज तो बधाई राजा नाभि
आज नगरी में जन्मे आदिनाथ
ॐ
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