Parv
जे सहज होरी के
होली खेलें मुनिराज शिखर
पर्वराज पर्युषण आया
तर्ज : चांदी की दीवार न तोडी
दिव्य ध्वनि वीरा
जिनमंदिर का शिलान्यास
अबके ऐसी दीवाली
तर्ज : अब मेरे समकित सावन आयो
ॐ
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Lyrics