चौबीस तीर्थंकर नाम चिह्न

श्री [[वृषभनाथ]] का कहता बैल, छोड़ो चार गति की जेल ।

[[अजितनाथ]] का कहता हाथी, जग में नही है कोई साथी ।

[[संभवनाथ]] का कहता घोड़ा, जीवन है अपना ये थोड़ा ।

[[अभिनंदन]] का कहता बंदर, कितनी कषाय भरी है अंदर ।

[[सुमतिनाथ]] का कहता चकवा, धर्मी का है जग में रुतवा ।

[[पद्मप्रभ]] का लाल कमल, कभी किसी से करो ना छल ।

श्री [[सुपार्श्वनाथ]] का कहता साथिया, काटो अब तुम कर्म घातिया ।

[[चन्द्रप्रभ]] का कहता चंद्रमा, सच्ची है जिनवाणी माता ।

[[पुष्पदंत]] का कहता मगर, मोक्षमहल की चलो डगर ।

[[शीतलनाथ]] का कहता कल्पवृक्ष, धर्म मार्ग में हो जा दक्ष ।

[[श्रेयांशनाथ]] का कहता गेंडा, कभी चलो न रास्ता टेडा ।

[[वासुपूज्य]] का कहता भैंसा, जैसी करनी फल हो वैसा ।

[[विमलनाथ]] का कहता सूकर, बुरे काम तू कभी ना कर ।

[[अनंतनाथ]] का कहता सेही, बड़े पुण्य से मिली ये देही ।

[[धर्मनाथ]] का कहता वज्रदण्ड, कभी ना करना कोई घमंड ।

[[शांतिनाथ]] का कहता हिरण, सत्य धर्म की रहो शरण ।

[[कुंथुनाथ]] का कहता बकरा, मोक्षमहाल का पथ है सकरा ।

[[अरनाथ]] की कहती मीन, रत्न कमा लो अब तीन ।

[[मल्लिनाथ]] का कहता कलशा, बनाओ निर्मल मन को जल सा ।

[[मुनिसुव्रत]] का कहता कछुआ, धर्म से जीवन सफल हुआ ।

[[नमिनाथ]] का कहता कमल, शुभ करनी का उत्तम फल ।

[[नेमिनाथ]] का कहता शंख, व्रती संयमी सम रहे निशंक ।

[[पारसनाथ]] का कहता सर्प, मिटाओ मन से सारे दर्प ।

[[महावीर]] का कहता शेर, चलो मोक्ष में करो ना देर ।

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