दस धरम में बस क्षमा

तर्ज : दिल के अरमां आंसुओं

दस धरम में बस क्षमा सिरताज है ।

उस क्षमा का दिन सुहाना आज है ॥टेक॥

क्रोध अरु मानादि, आतम के विभाव ।

तो क्षमा आतमनिधि सुख साज है ।

उस क्षमा का दिन सुहाना आज है ॥१॥

क्रोध भूलें दान दें उत्तम क्षमा ।

याचना से मान जाता भाग है ।

उस क्षमा का दिन सुहाना आज है ॥२॥

गर सभी सोचें, स्व-सुख अरु दुःख का मूल ।

चहुं कषायों की असि आघात है ।

उस क्षमा का दिन सुहाना आज है ॥३॥

होगा ये अवसर, सफल नरभव सदा ।

धोले अन्तर से कलुषता भाव है ।

उस क्षमा का दिन सुहाना आज है ॥४॥

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