देखो गरब गहेली

देखो गरब-गहेली री हेली ! जादोंपति की नारी ॥टेक॥

कहां नेमि नायक निज मुखसौं, टहल कहै बड़भागी ।

तहां गुमान कियो मतिहीनी, सुनि उर दौसी लागी ॥

देखो गरब-गहेली री हेली ! जादोंपति की नारी ॥१॥

जाकी चरण धूलि को तरसैं, इन्द्रादिक अनुरागी ।

ता प्रभुको तन-वसन न पीड़े, हा! हा! परम अभागी ॥

देखो गरब-गहेली री हेली ! जादोंपति की नारी ॥२॥

कोटि जनम अघभंजन जाके, नामतनी बलि जइये ।

श्री हरिवंशतिलक तिस सेवा, भाग्य बिना क्यों पइये ॥

देखो गरब-गहेली री हेली ! जादोंपति की नारी ॥३॥

धनि वह देश धन्य वह धरनी, जग में तीरथ सोई ।

'भूधर' के प्रभु नेमि नवल निज, चरन धरे जहां दोई ॥

देखो गरब-गहेली री हेली ! जादोंपति की नारी ॥४॥

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