पार्श्व प्रभुजी पार

तर्ज : नगरी नगरी द्वारे द्वारे

पार्श्व प्रभुजी पार लगादो, मेरी यह नावरिया ।

बीच भंवर में आन फंसी है काढोजी सांवरिया ॥टेक॥

धर्मी तारे बहुत ही तुमने, एक अधर्मी तार दो ।

वीतराग है नाम तिहारो तीन जगत हितकार हो ।

अपना विरद निहारो स्वामी, काहे को विसरिया ।

पार्श्व प्रभुजी पार लगादो, मेरी यह नावरिया ॥१॥

चोर भील चांडाल हैं तारे, ठील क्यों मेरी बार है ।

नाग नागिनी जरत उबारे, मन्त्र दिया नवकार है ।

दास तिहारो संकट में है, लीजोजी खबरिया ।

पार्श्व प्रभुजी पार लगादो, मेरी यह नावरिया ॥२॥

लोहे को जो कंचन करदे, पारस नाम प्रमान वो ।

मैं हूँ लोहा तुम प्रभु पारस, क्यों ना फिर कल्याण हो ।

पार्श्व प्रभुजी पार लगादो, मेरी यह नावरिया ॥३॥

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