फूली बसन्त जहँ

फूली बसन्त जहँ आदीसुर शिवपुर गये ।

भारतभूप बहत्तर जिनगृह, कनकमयी सब निरमये ॥टेक॥

तीन चौबीस रतनमय प्रतिमा, अंग रंग जे जे भये ।

सिद्ध समान सीस सम सबके, अद्भुत शोभा परिनये ॥

फूली बसन्त जहँ आदीसुर शिवपुर गये ॥१॥

बालि आदि आहूठ-कोड़ मुनि, सबनि मुकति सुख अनुभये ।

तीन अठाई फागनि खग गावैं गीत नये नये ॥

फूली बसन्त जहँ आदीसुर शिवपुर गये ॥२॥

वसु जोजन वसु पैड़ी गंगा, फिरी बहुत सुरआलये ।

'द्यानत' सो कैलास नमौं हौं, गुन कापै जा वरनये ॥

फूली बसन्त जहँ आदीसुर शिवपुर गये ॥३॥

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