मूंजी धरी रहेली

तर्ज : लावणी

मूंजी धरी रहेली पूंजी, पाई साथ न जावेली,

पाई साथ न जावेली ओ पाई साथ न जावेली,

मूंजी धरी रहेली पूंजी, पाई साथ न जावेली ॥टेक॥

खोल हाट बणकर व्यापारी, करी रात दिन मायाचारी,

भरी तिजोर्यां तलघर थैल्याँ, काम न आवेली ।

मूंजी धरी रहेली पूंजी, पाई साथ न जावेली ॥१॥

हाथी घोड़ा मोटर गाड़ी, रतन जड़ाऊ अम्बाबाड़ी,

बैठ फिर्यो पी माया मदिरा, तनै भ्रमावेली ।

मूंजी धरी रहेली पूंजी, पाई साथ न जावेली ॥२॥

ए सत खंड्या महल अटारी, पुत्र पौत्र, दासी घरवाली,

स्वार्थ भरी है रिश्तेदारी, तनै भुलावेली ।

मूंजी धरी रहेली पूंजी, पाई साथ न जावेली ॥३॥

धन के खातिर हो हो भेला, लोक दिखाऊ देसी हेला,

दान पुण्य ही शुभ करणी है, साथे जावेली ।

मूंजी धरी रहेली पूंजी, पाई साथ न जावेली ॥४॥

अन्तर बाहिर शुद्धि कर ले, भोग लालसा मन सूँ हरले,

शौच धरम ही जग में पावन, तनै बणावेली ।

मूंजी धरी रहेली पूंजी, पाई साथ न जावेली ॥५॥

परिग्रह का परिमाण धार ले, वीतरागता हृदय सार ले,

समझ श्रेष्ठ 'सौभाग्य' वरण शिव लक्ष्मी आवेली ।

मूंजी धरी रहेली पूंजी, पाई साथ न जावेली

पाई साथ न जावेली ओ पाई साथ न जावेली ॥६॥

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