म्हानै पतो बताद्यो थाँसू

तर्ज : लावणी

म्हानै पतो बताद्यो, थाँसू दुनिया में दूजो और कुण ॥टेक॥

तीन लोक पति आप चराचर, तीन काल की जाणो,

थाँनै छोड़ शरण ल्यूँ कुण री, या तो जरा बताद्यो ॥

म्हानै पतो बताद्यो, थाँसू दुनिया में दूजो और कुण ॥१॥

मिल्या अनन्ता कामी क्रोधी, भोग रोग भव वासी,

वीतराग निर्दोष न भेंट्यो, देखी मथुरा काशी ॥

म्हानै पतो बताद्यो, थाँसू दुनिया में दूजो और कुण ॥२॥

वात पित्त कफ तन पीड़ा हर, वन वन औषध ऊभी,

जन्म जरा मृत्यु भय नाशक, मिली न थाँसी खूबी ॥

म्हानै पतो बताद्यो, थाँसू दुनिया में दूजो और कुण ॥३॥

उत्तम मंगल शरण आपकी, दर्शन आनन्दकारी,

निज पर ज्ञान कला सरसावे, निश्चय सुख फुलवारी ॥

म्हानै पतो बताद्यो, थाँसू दुनिया में दूजो और कुण ॥४॥

इन्द्र संपदा चक्रीपद की, नही याचना थाँसू,

आतम बल 'सौभाग्य' दिपास्यूँ, मिलै मोक्ष पद जासूँ ॥

म्हानै पतो बताद्यो, थाँसू दुनिया में दूजो और कुण ॥५॥

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