रटि रसना मेरी

राग बिलावल, रघुपति राघव राजाराम

रटि रसना मेरी ऋषभ जिनन्द, सुर नर जच्छ चकोरन चन्द ॥टेक॥

नामी नाभि नृपति के बाल, मरुदेवी के कुंवर कृपाल ॥रटि…१॥

पूज्य प्रजापति पुरुष पुरान, केवल-किरन धरैं जगभान ॥रटि…२॥

नरकनिवारन विरद विख्यात, तारन-तरन जगत के तात ॥रटि…३॥

'भूधर' भजन दिने निरवाह, श्रीमद् पद्म भंवर हो जाह ॥रटि…४॥

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