रटि रसना मेरी ऋषभ जिनन्द, सुर नर जच्छ चकोरन चन्द ॥टेक॥
नामी नाभि नृपति के बाल, मरुदेवी के कुंवर कृपाल ॥रटि…१॥
पूज्य प्रजापति पुरुष पुरान, केवल-किरन धरैं जगभान ॥रटि…२॥
नरकनिवारन विरद विख्यात, तारन-तरन जगत के तात ॥रटि…३॥
'भूधर' भजन दिने निरवाह, श्रीमद् पद्म भंवर हो जाह ॥रटि…४॥