वंदों अद्भुत चन्द्र वीर

तर्ज : देखो जी आदीश्वर स्वामी

वंदों अद्भुत चन्द्र वीर जिन, भवि-चकोर-चितहारी ॥टेक॥

सिद्धारथ-नृप-कुल-नभ-मंडन, खंडन भ्रमतम भारी ।

परमानंद-जलधि-विस्तारन, पाप-ताप-छयकारी ॥

वंदों अद्भुत चन्द्र वीर जिन, भवि-चकोर-चितहारी ॥१॥

उदित निरंतर त्रिभुवन अंतर, कीरति किरण प्रसारी ।

दोष-मलंक-कलंक अटंकित, मोहराहु निरवारी ॥

वंदों अद्भुत चन्द्र वीर जिन, भवि-चकोर-चितहारी ॥२॥

कर्मावरण पयोद अरोधित, बोधित शिवमगचारी ।

गणधरादि मुनि उडुगन सेवत, नित पूनमतिथि धारी ॥

वंदों अद्भुत चन्द्र वीर जिन, भवि-चकोर-चितहारी ॥३॥

अखिल अलोकाकाशउलंघन, जास ज्ञान-उजयारी ।

'दौलत' मनसाकुमुदनिमोदन, जयो चरम जगतारी ॥

वंदों अद्भुत चन्द्र वीर जिन, भवि-चकोर-चितहारी ॥४॥

0:00
0:00