हे परम दिगम्बर यति

हे परम दिगम्बर यति, महागुण व्रती, करो निस्तारा ।

नहिं तुम बिन हितू हमारा ॥टेक॥

तुम बीस आठ गुणधारी हो, जग जीवमात्र हितकारी हो ।

बाईस परीषह जीत धरम रखवारा

नहिं तुम बिन हितू हमारा ॥१॥

तुम आतमज्ञानी ध्यानी हो, शुचि स्वपर भेद-विज्ञानी हो ।

है रत्नत्रय गुणमंडित हृदय तुम्हारा

नहिं तुम बिन हितू हमारा ॥२॥

तुम क्षमाशील समता-सागर, हो विश्व पूज्य वर रत्नाकर ।

है हित मित सत उपदेश तुम्हारा प्यारा

नहिं तुम बिन हितू हमारा ॥३॥

तुम धर्ममूर्ति हो समदर्शी, हो भव्य जीव मन आकर्षी ।

है निर्विकार निर्दोष स्वरूप तुम्हारा

नहिं तुम बिन हितू हमारा ॥४॥

है यही अवस्था एक सार, जो पहुँचाती है मोक्ष द्वार ।

'सौभाग्य' आप-सा बाना होय हमारा

नहिं तुम बिन हितू हमारा

हे परम दिगम्बर यति, महागुण व्रती, करो निस्तारा ।

नहिं तुम बिन हितू हमारा ॥५॥

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