तुमसे लागी लगन ले लो अपनी शरण–पारस प्यारा,
मेटो मेटो जी संकट हमारा।
निशदिन तुमको जपूं पर से नेहा तजूं–जीवन सारा,
तेरे चरणों में बीते हमारा॥ तुमसे लागी…॥
अश्वसेन के राज दुलारे, वामा देवी के सुत प्राण प्यारे।
सबसे नेहा तोडा जग से मुख को मोडा–संयम धारा,
मेटो मेटो जी संकट हमारा॥ तुमसे लागी…॥
इन्द्र और धरणेन्द्र भी आये, देवी पद्मावती मंगल गाये।
आशा पूरो सदा, दुख नहीं पावे कदा–सेवक थारा,
मेटो मेटो जी संकट हमारा॥ तुमसे लागी…॥
जग के दुख की तो परवाह नहीं है, स्वर्ग सुख की भी चाह नहीं है।
मेटो जामन मरण होवे ऐसा जतन–तारण हारा,
मेटो मेटो जी संकट हमारा॥ तुमसे लागी…॥
लाखों बार तुम्हें शीश नवाऊं, जग के नाथ तुम्हें कैसे पाऊं।
पंकज व्याकुल भया, दर्शन बिन ये जिया–लागे खारा,
मेटो मेटो जी संकट हमारा॥ तुमसे लागी…॥