Dev
हम यही कामना करते हैं
हे जिन तेरे मैं शरणै
हे जिन मेरी ऐसी बुधि
हे प्रभो चरणों में
हे वीर तुम्हारे द्वारे पर
सांची कहें तोहरे दर्शन से
तर्ज : सांची कहें तोरे आवन से हमरा
सुरपति ले अपने शीश
स्वर्ग से सुंदर अनुपम
तर्ज : स्वर्ग से सुंदर, सपनों से प्यारा
स्वागत करते आज तुम्हारा
श्री अरहंत सदा मंगलमय
सच्चे जिनवर सच्चे सारे
रोम रोम से निकले
लिया प्रभू अवतार जयजयकार
वर्तमान को वर्धमान की
वीतरागी देव
शौरीपुर वाले
मेरे सर पर रख दो
रंग दो जी रंग जिनराज
रंगमा रंगमा
रोम रोम पुलकित हो जाये
रोम रोम में नेमिकुंवर के
वर्धमान ललना से
हे वीर तुम्हारे
महावीर स्वामी
मेरे मन मंदिर में आन
मस्तक झुका के
तर्ज : दे दी हमें आजादी
वर्तमान को वर्धमान
जय बोलो त्रिशला
तुझे प्रभु वीर कहते
प्रभु हम सब का एक
प्रभुजी अब ना भटकेंगे
बाहुबली भगवान
भगवान मेरी नैया उस
भावना की चूनरी
तुमसे लागी लगन
पारस प्यारा लागो
पारस प्रभु का
तर्ज – रिमझिम बरसता सावन
मंगल थाल सजाकर
मेरे प्रभु का पारस
मैं करूँ वंदना
पंचपरम परमेष्ठी
रोम रोम में नेमि
दिन रात स्वामी तेरे गीत
तर्ज : तुम्हीं मेरे मंदिर, तुम्हीं मेरी पूजा
नाम तुम्हारा तारणहारा
तर्ज : फूल तुम्हे भेजा है ख़त मेंतुझे देखकर जगवाले पर
निरखी निरखी मनहर
निरखो अंग अंग जिनवर
निरखो अंग अंग
नेमि जिनेश्वर
तेरी परम दिगंबर मुद्रा को
तेरी शीतल शीतल मूरत
तर्ज : तेरी प्यारी प्यारी सूरत को
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ॐ
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