कैसो सुंदर अवसर आयो है

तर्ज : काई जमानो आग्यो रे

कैसो सुंदर अवसर आयो है, आयो है

ज्ञान स्वभावी आत्मा, मेरे मन को भायो है ॥

भूतकाल प्रभु आपका, वह मेरा वर्तमान,

वर्तमान जो आपका, वह भविष्य मम जान ॥

रूप तुम्हारा सबसे न्यारा, भेद ज्ञान करना,

जौलों पौरुष थके न तौलों, उद्यम सो चरना ॥

अनुभव चिंतामणी रतन, अनुभव है रस कूप,

अनुभव मारग मोक्ष को, अनुभव मोक्ष स्वरूप ॥

जो कर्त्ता सो भोक्ता, साथी सगा न कोय,

धर्म छुडावे बंध ते, धर्म धरो सब कोय ॥

निर्मल ध्यान लगाय कर, कर्म कलंक नशाय,

भये सिद्ध परमात्मा, वन्दूं मन वच काय ॥

0:00
0:00