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हे चेतन चेत जा अब तो
तर्ज : तू इतनी दूर क्यों है माँ
हे भविजन ध्याओ आतमराम
हे मन तेरी को कुटेव यह
हे सीमंधर भगवान शरण
जे सहज होरी के
हठ तजो रे बेटा हठ
हम अगर वीर वाणी
तर्ज: तुम अगर साथ देने का
हम न किसीके कोई न हमारा
राग : रामकली
हमने तो घूमीं चार गतियाँ
हूँ स्वतंत्र निश्चल
सोते सोते ही निकल
स्वारथ का व्यवहार जग
साधना के रास्ते आत्मा के
तर्ज : ऐ मेरे प्यारे वतन
सिद्धों से मिलने का मार्ग
सुन चेतन ज्ञानी क्यों
तर्ज : करती हूँ व्रत तुम्हारा
सुन रे जिया चिरकाल गया
सुन ले ओ भोले प्राणी
तर्ज : वो दिल कहाँ से लाऊं - भरोसा
सुमर सदा मन आतमराम
राग : बिलावल, रघुपति राघव राजाराम
वीर भज ले रे भाया
शुद्धात्मा का श्रद्धान
सजधज के जिस दिन
सन्त निरन्तर चिन्तत
सब जग को प्यारा
समकित सुंदर शांति अपार
तर्ज : पतझड़ सावन बसंत बहार
ये शाश्वत सुख का प्याला
यही इक धर्ममूल है
तर्ज : दुविधा कब जै है या मन की
मैं हूँ आतमराम
तर्ज: छलिया मेरा नाम
मैनासुंदरी कहे पिता से
तर्ज : कसमें वादे प्यार वफा सब
मोको कहाँ ढूंढें बन्दे
मोक्ष पद मिलता है धीरे धीरे
मोह की महिमा देखो
मोहे भावे न भैया थारो देश
मेरे शाश्वत शरण
तर्ज: तुमसे लागी लगन
मैं क्या माँगू भगवान
स्वर : पं मांगीलाल जी, कोलारस वाले
मैं ज्ञानानंद स्वभावी हूं
मैं निज आतम कब
मैं राजा तिहुं लोक का
वीर भज ले रे
मान न कीजिये हो
राग : मल्हार
मितवा रे सुवरण अवसर
तर्ज :- बन्ना रे बागा में झूला डाल्या
मुझे है स्वामी उस बल
मेरा आज तलक प्रभु
मन महल में दो
ममता तू न गई मोरे
स्वर : पं मांगीलाल जी, कोलारस वाले
प्रभु शांत छवि तेरी
बेला अमृत गया आलसी सो रहा
भगवंत भजन क्यों
भरतजी घर में ही वैरागी
भला कोई या विध मन
कविवर - भवानीदास जी
भूल के अपना घर
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ॐ
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