Adhyatm
केवलिकन्ये वाङ्गमय
कोई राज महल में रोए
कोई लाख करे चतुराई
कौलो कहूँ स्वामी बतियाँ
क्या तन मांझना रे
कहाँ तक ये मोह के अंधेरे
ओ प्यारे परदेशी पन्छी
कंकड़ पत्थर गले लगाए
कबधौं सर पर धर डोलेगा
तर्ज : नगरी नगरी द्वारे द्वारे
कर कर आतमहित रे
तर्ज : मन तरपत हरि दर्शन
उड़ उड़ रे म्हारी ज्ञान
ऐ आतम है तुझको नमन
तर्ज : ए मालिक तेरे बंदे हम
ऐसे जैनी मुनिमहाराज
ऐसो नरभव पाय गंवायो
ओ जाननहारे जान जगत है
ओ जीवड़ा तू थारी
आतमरूप सुहावना
आत्म चिंतन का ये समय
तर्ज : तुमको देखा तो ये खयाल
आत्मा अनंत गुणों का धनी
तर्ज - रिश्तो के भी रूप बदलते है
आत्मा हूँ आत्मा हूँ आत्मा
तर्ज : दिल के अरमाँ आसुओं में
आनंद स्रोत बह रहा
तर्ज :- दे दी हमें आजादी
आया कहां से
आतमरूप अनूपम है
आओ झूलें मेरे चेतन
आओ रे आओ रे ज्ञानानंद की
तर्ज : कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया
आज सी सुहानी
आतम अनुभव आवै
आतम अनुभव करना रे भाई
राग : असावरी
आतम अनुभव कीजै हो
आतम जानो रे भाई
अब गतियों में नाहीं रुलेंगे
अब मेरे समकित सावन
राग : मल्हार; तर्ज : आज मैं परम पदारथ
अब हम अमर भये
राग : असावरी
अरे मोह में अब ना
तर्ज : अजी रूठकर अब
आ तुझे अंतर में शांति मिलेगी
अपना करना हो कल्याण
अपने घर को देख बावरे
तर्ज :- जिसने राग द्वेष कामादिकनगरी नगरी द्वारे द्वारेफूल तुम्हें भेजा है खत मेंप्यार में होता है क्या जादू
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ॐ
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