Dev
तेरे दर्शन को मन
तेरे दर्शन से मेरा
दयालु प्रभु से दया
तर्ज : तुम्ही मेरे मंदिर, तुम्ही मेरे पूजा
दरबार तुम्हारा मनहर है
तुम्ही हो ज्ञाता
तू ज्ञान का सागर है
तर्ज : तू प्यार का सागर
तेरी छत्रछाया भगवन् मेरे
झीनी झीनी उडे रे
तिहारे ध्यान की मूरत
तर्ज : बहारों फूल बरसाओ मेरा
तुम जैसा मैं भी
तर्ज : चाँद सी महबूबा हो मेरी
तुमसे लागी लगन
तुम्हारे दर्श बिन स्वामी
जिनवर तू है चंदा तो
तर्ज : सावन का महिना पवन करे शोर - मिलन
जिनवर दरबार तुम्हारा
तर्ज : सूरज कब दूर गगन से
चाह मुझे है दर्शन की
जपि माला जिनवर
राग : सारङ्ग
जब कोई नहीं आता
जिन मंदिर में आके हम
तर्ज : हमको मन की शक्ति देना
कैसा अद्भुत शान्त स्वरूप
कैसी सुन्दर जिन प्रतिमा
तर्ज : प्यार में होता है क्या जादूचाँद सी महबूबा हो मेरे कब
कोई इत आओ जी
निरखत जिन चंद्रवदन
केसरिया केसरिया
ओ जगत के शांति दाता
तर्ज : ओ बसंती पवन पागल
कभी वीर बनके
कर लो जिनवर का गुणगान
करुणा सागर भगवान
आज हम जिनराज
जपलो रे आदीश्वर
देखो जी आदिश्वर
आये आये रे जिनंदा
आयो आयो रे हमारो
अपना ही रंग मोहे
अरिहंत देव स्वामी शरण
अशरीरी सिद्ध भगवान
तर्ज :- ऐ मेरे दिले नादां
आओ जिनमंदिर में आओ
आज खुशी तेरे दर्शन की
तर्ज : मैं तुलसी तेरे आँगन कीघर आया मेरा परदेसी
अंतर में आनंद आयो
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ॐ
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