आकुल रहित होय इमि

तर्ज : प्यार में होता है क्या जादू

आकुल रहित होय इमि निशिदिन, कीजे तत्त्व विचारा हो ।

को मैं कहा रूप है मेरा, पर है कौन प्रकारा हो ॥टेक॥

को भव-कारण बन्ध कहा, को आस्रव रोकनहारा हो ।

खिपत कर्म बन्धन काहे सों, थानक कौन हमारा हो ॥2॥

इमि अभ्यास किये पावत है, परमानन्द अपारा हो ।

'भागचन्द' यह सार जान करि, कीजै, बारम्बारा हो ॥3॥

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