आज खुशी तेरे दर्शन की

तर्ज : मैं तुलसी तेरे आँगन कीघर आया मेरा परदेसी

आज खुशी तेरे दर्शन की,

प्यास बुझी है, मेरे नयनन की ॥टेक॥

बड़ा पुण्य अवसर ये आया, आज तुम्हारा दर्शन पाया ।

भक्ति में जब चित्त लगाया, चेतन में तब चित्त ललचाया ॥

शरण मिली तेरे चरणन की ॥१ आज॥

तेरे दर्शन से हे प्रभुवर, अंतरज्योति आज जलाऊँ ।

तेरी वाणी से मैं अद्भुत, भेदज्ञान की कला प्रगटाऊँ ॥

मूरत मेरे भगवन की ॥२ आज॥

ज्ञाता दृष्टा बनकर अब तो, कर्ता-भोक्ता भाव मिटाऊँ ।

फौज भगाई करमन की ॥३ आज॥

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