खेलौंगी होरी आये

खेलौंगी होरी, आये चेतनराय ॥टेक॥

दरसन वसन ज्ञान रँग भीने, चरन गुलाल लगाय ॥खेलौं…१॥

आनँद अतर सुनय पिचकारी, अनहद बीन बजाय ॥खेलौं…२॥

रीझौं आप रिझावौं पियको, प्रीतम लौं गुन गाय ॥खेलौं…३॥

'द्यानत' सुमति सुखी लखि सुखिया, सखी भई बहु भाय ॥खेलौं…४॥

0:00
0:00