चलो सखी खेलन होरी

तर्ज : राग काफी होरी

रंग मच्यो जिन द्वार, चलो सखी खेलन होरी,

ओ चलो सखी खेलन होरी, रंग मच्यो जिन द्वार ॥टेक॥

सुमति सखी सब मिलकर आवो, कुमति ने देवो निकार,

केशर चन्दन और अर्गजा समता भाव धुलाव ॥

चलो सखी खेलन होरी, रंग मच्यो जिन द्वार ॥1॥

दया मिठाई तप बहु मेवा सित ताम्बूल चबाय,

आठ कर्म की डोरी रची है ध्यान अग्नि सूं जलाय ॥

चलो सखी खेलन होरी, रंग मच्यो जिन द्वार ॥2॥

गुरु के वचन मृदंग बजत है, ज्ञान क्षमा डफ ताल,

कहत 'बनारसी' या होरी खेलो, मुकतिपुरी को राव ॥

चलो सखी खेलन होरी, रंग मच्यो जिन द्वार ॥3॥

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