चेतना लक्षणम् आनंद

(तर्ज:-तुमसे लागी लगन)

चेतना लक्षणम्, आनंद वंदनं,

वंदनं, वंदनं, वंदनं, वंदनं ॥टेक॥

शुद्धातम हो सिद्ध स्‍वरूपी,

ज्ञान दर्शन मय हो अरूपी,

शुद्ध ज्ञानं मयं, चेतना नंदनं,

वंदनं वंदनं, वंदनं वंदनं…….॥१॥

द्रव्‍य भाव नो कर्मों से न्‍यारे,

मात्र ज्ञायक हो इष्‍ट हमारे,

सु-समय चिन्‍मयं, निर्मलानंदनं,

वंदनं, वंदनं, वंदनं, वंदनं……॥२॥

पंच परमेष्‍ठी जिसको ही ध्‍याते,

तुम ही तारण-तरण हो कहाते,

शाश्वतं जिनवरं, ब्रह्मनंदनं,

वंदनं, वंदनं, वंदनं, वंदनं…..॥३॥

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