धिक धिक जीवन

धिक! धिक! जीवन समकित बिना

दान शील तप व्रत श्रुतपूजा,

आतम हेत न एक गिना ॥

ज्यों बिनु कन्त कामिनी शोभा,

अंबुज बिनु सरवर ज्यों सुना ।

जैसे बिना एकड़े बिन्दी,

त्यों समकित बिन सरब गुना ॥१॥

जैसे भूप बिना सब सेना,

नीव बिना मन्दिर चुनना ।

जैसे चन्द बिहूनी रजनी,

इन्हैं आदि जानो निपुना ॥२॥

देव जिनेन्द्र, साधु गुरू, करुना,

धर्मराग व्योहार भना ।

निहचै देव धरम गुरु आतम,

'द्यानत' गहि मन वचन तना ॥३॥

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