प्रभुजी मन मंदिर में आओ

प्रभुजी, मन मंदिर में आओ ॥टेक॥

हृदय सिंहासन सूना तुम बिन, उसमें आ बस जाओ ॥१॥

नीरस मन को भक्ति के रस में, प्रभुवर अब सरसाओ ॥२॥

भर दे सद्गुण गण प्रभु मुझमें, दुर्गुण दूर हटाओ ॥३॥

आनंदमय हो जाऊँ ऐसा, प्रभु सन्मार्ग बताओ ॥४॥

जीवन यह आदर्श बने प्रभु, ज्ञान की ज्योति जगाओ ॥५॥

शुद्ध उपयोग में रमण करूं मैं, सज्जन तुम मिल जाओ ॥६॥

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