मैं क्या माँगू भगवान

स्वर : पं मांगीलाल जी, कोलारस वाले

मैं क्या माँगूं भगवान, कि तुमसे क्या माँगूं ?

मेरे रोम-रोम में बस जाओ भगवान,

और मैं क्या माँगूं ॥टेक॥

धन न माँगूं भगवन्, मान न माँगूं

झूठे जग की शान न माँगूं ।

देना हो तो दे दो भगवन्,

जपने को जिननाम, और मैं क्या माँगूं ॥१॥

हे प्रभु तुम तो अन्तर्यामी,

पार करो ये नाव हमारी ।

दया करो हे दया सिंधु भगवान,

करो कल्याण, और मैं क्या माँगूं ॥२॥

तुम सारे जग के रखवारे,

तुम हो सबके जाननहारे ।

चरणों में रहे ध्यान प्रभुजी,

दे ऐसा वरदान, और मैं क्या माँगूं ॥३॥

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