मैनासुंदरी कहे पिता से

तर्ज : कसमें वादे प्यार वफा सब

मैनासुंदरी कहे पिता से भाग्य उदय जब आएगा ।

कोडी पति जो दिया आपने, काम-देव बन जाएगा ॥

बोले पिता इक दिन बेटी से, किसके भाग्य का खाती हो

सब-कुछ मैंने दिया है तुम, क्या मेरे अवगुण गाती हो ॥

मैना बोली मीठे बैना, सच्ची बात बताती हूँ ।

जो सत्कर्म किए थे मैंने उसका ही फल पाती हूँ ।

अपने सत्कर्मों के बदले, हर दुख सुख बन जाएगा ॥१… मैना॥

कोडी पिता ने दंभी होकर, कोडी का रोगी बुलवाया ।

प्राणों से प्यारी मैना का फिर, ब्याह उसी से रचवाया ।

सागर रोया, रो दी नगरिया, पर्वत का दिल थर्राया ॥

आई विदाई की बेला तो, बाप का दिल भी भर आया ।

मेरे कहानी जो भी सुनेगा, नफरत ही कर पाएगा ॥२… मैना॥

तुमने मुझको दुख में भेजा, अपना फर्ज निभाया है ।

कल क्या होगा, किसने जाना, कर्म बली कहलाया है ॥

इन कर्मों की लीला न्यारी, सबको नाच नचाते हैं ।

शाम को राजा बनने वाले, सुबह को ही बन जाते हैं ।

मेरी किस्मत सुख होगा तो, दुख भी सुख हो जाएगा ॥३ … मैना॥

0:00
0:00