सीमंधर स्वामी

तर्ज :- जिनवाणी माता दर्शन की बलिहारियां

सीमंधर स्वामी, मैं चरनन का चेरा ॥टेक॥

इस संसार असार में कोई, और न रक्षक मेरा ॥सीमंधर॥

लख चौरासी जोनी में मैं, फ़िरि फ़िरि कीनों फ़ेरा

तुम महिमा जानी नहीं प्रभु, देख्या दु:ख घनेरा ॥सीमंधर १॥

भाग उदयतैं पाइया अब, कीजे नाथ निवेरा

बेगी दया करी दीजिये मुझे, अविचल थन-बसेरा ॥सीमंधर २॥

नाम लिये अघ ना रहै ज्यों, ऊगें भान अंधेरा

'भूधर' चिंता क्या रही ऐसी, समरथ साहिब तेरा ॥सीमंधर ३॥

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