हम न किसीके कोई न हमारा

राग : रामकली

हम न किसी के कोई न हमारा, झूठा है जगका ब्योहारा

तन-सम्बन्धी सब परिवारा, सो तन हमने जाना न्यारा ॥

पुन्य उदय सुख का बढ़वारा, पाप उदय दुख होत अपारा ।

पाप पुन्य दोऊ संसारा, मैं सब देखन जानन हारा ॥

हम न किसी के कोई न हमारा, झूठा है जगका ब्योहारा ॥१॥

मैं तिहुँ जग तिहुँ काल अकेला, पर संजोग भया बहु मेला ।

थिति पूरी करि खिर खिर जांहीं,मेरे हर्ष शोक कछु नाहीं ॥

हम न किसी के कोई न हमारा, झूठा है जगका ब्योहारा ॥२॥

राग भावतैं सज्जन मानैं, दोष भावतैं दुर्जन जानैं ।

राग दोष दोऊ मम नाहीं, 'द्यानत' मैं चेतनपदमाहीं ॥

हम न किसी के कोई न हमारा, झूठा है जगका ब्योहारा ॥३॥

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