सारद तुम परसाद तैं Text only सुन जिन बैन श्रवन सुख Text only सुन सुन रे चेतन प्राणी Text only हमें निज धर्म पर चलना Text only हे जिनवाणी माता तुमको Text only हे शारदे माँ Text only वीर हिमाचल तें निकसी Text only शरण कोई नहीं जग में Text only प्राणां सूं भी प्यारी लागे Text only भवदधि तारक नवका जगमाहीं Text only मंगल बेला आई आज श्री Text only मन भाया, तेरे दर आया Text only नित्य बोधिनी माँ जिनवाणी Text only जिनवाणी माता रत्नत्रय निधि Text only जिनवाणी माता से बोले आतम नन्द लाला Text only जिनवाणी सुन उपदेशी Text only जिनवर चरण भक्ति वर गंगा Text only जिनवाणी अमृत रसाल Text only जिनवाणी को नमन करो Text only जिनवाणी माँ जिनवाणी माँ Text only आत्मा_ही_समयसार Text only इतनी शक्ति हमें देना माता Text only करता हूं मैं अभिनंदन Text only निर्मोही नेमी जाओ ना Text only रे मन भज भज दीन दयाल Text only आतम जानो र भाई Text only भ्रात ऐसी खेलिये Text only मेरो मन ऐसी खेलत Text only चेतन खेलै होरी Text only ज्ञानी ऐसे होली मचाई Text only निजपुर में आज मची Text only अहो दोऊ रंग भरे Text only आयो सहज बसन्त खेलैं Text only और सब मिलि होरि Text only कहा बानि परी पिय Text only कैसे होरी खेलूँ होरी Text only खेलूंगी होरी श्रीजिनवर Text only खेलौंगी होरी आये Text only चलो सखी खेलन होरी Text only चेतन खेल सुमति संग Text only मंगल महोत्‍सव भला आ गया Text only होरी खेलूंगी घर आए Text only अब घर आये चेतनराज Text only अरे मन कैसी होली Text only वीर शासन जयंती वैशाख शुक्ल Text only जब बानी खिरी Text only प्राणां सूं भी प्यारी Text only वीरशासनजयंती वैशाख शुक्ल Text only श्री सिद्धचक्र का पाठ फल पायो आतम ध्यानी Text only आचार्य श्री धरसेन जो Text only
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