Text Bhajan
भूतबली श्री पुष्पदन्त
पर्वराज पर्यूषण आया
ये पर्व पर्युषण प्यारा है
पर्व अठाई जब जब आवे
महावीर जयंती आई
मंगल गाओ
जय मुनिवर विष्णुकुमार
वीर की वाणी
पर्व पर्युषण आया आनंद
पर्व पर्युषण आया है
दश धर्मों को धार सोलह
दशलक्षण के दश धर्मों
दस लक्षणों को ध्याके
दसलक्षण पर्व का समा
धर्म के दशलक्षण
पर्व दशलक्षण मंगलकार
पर्व दस लक्षण खुशी से
आयो आयो पर्व अठाई
आयो पर्व अठाई
प्राणां सूं भी प्यारी लागे
महाराजा स्वामी
म्हानै पतो बताद्यो थाँसू
म्हारा चेतन ज्ञानी घणो
लगी म्हारा नैना री डोरी
मूंजी धरी रहेली
हजूरिया ठाडो
चाँदनी फीकी पड़ जाए
चेतन नरभव ने तू पाकर
छवि नयन पियारी जी
जीवड़ा सुनत सुणावत इतरा
धोली हो गई रे काली कामली
निर्मोही नेमी जाओ ना गिरनार
निर्मोही नेमी जाओ ना
निर्मोही नेमी जाओ ना
पारस प्यारा लागो
चार दिनां को जीवन मेलो
कठिन नर तन है पायो
थाँकी उत्तम क्षमा पै
गलती आपाँ री न जाणी
चन्द्रगुप्त राजा के सोलह स्वप्न
मंत्र जपो नवकार मनुवा
मंत्र नवकारा हृदय में धर
नमन हमारा अरिहंतों को
बने जीवन का मेरा आधार रे
करना मन ध्यान महामंत्र
जप जप रे नवकार मंत्र
जप ले मंत्र सदा नवकार
जय जय जय कार परमेष्ठी
णमो अरिहंताणं णमो सिद्धाणं
णमोकार नाम का ये कौन मंत्र