Text Bhajan
ये जैन होने का परिचय
रेल चली भई रेल चली
वर्धमान बोलो भैया बोलो
सूरत प्यारी प्यारी है
जिनमंदिर आना सभी
ज्ञाता दृष्टा राही हूं
ज्ञानी का ध्यानी का सबका
जगमग आरती कीजे आदीश्वर
चौबीस तीर्थंकर नाम चिह्न
मेरे महावीर झूले पलना
मोरी आली आज बधाई गाईयाँ
ये महामहोत्सव पंच कल्याणक
लिया रिषभ देव अवतार
पंखिडा रे उड के आओ
बधाई आज मिल गाओ
पालकी उठाने का हमें अधिकार है
बधाई आज मिल गाओ
कुण्डलपुर वाले
देखा मैंने त्रिशला का लाल
पंखिडा रे उड के आओ कुंड्लपुर
पंखिडा रे उड के आओ शोरीपुर
पंचकल्याण मनाओ मेरे साथी
जूनागढ़ में सज गए
झूल रहा पलने में वामा दुलारा
जनम लिया है महावीर ने
जहाँ महावीर ने जन्म लिया
कुण्डलपुर में वीर हैं जन्मे
कुण्डलपुर वाले वीरजी
गावो री बधाईयां
चन्द्रोज्वल अविकार स्वामी जी
आज नगरी में जन्मे
ऋषभदेव जनम्यौ
लिया रिषभ देव
आनंद अंतर मा आज न समाय
आनंद अवसर आज सुरगण
आज जन्मे हैं तीर्थंकर
सम आराम विहारी साधुजन
म्हारे आंगणे में आये मुनिराज
वे मुनिवर कब मिली हैं उपगारी
शुद्धातम तत्व विलासी रे
धन्य मुनिराज हमारे हैं
परम दिगम्बर यती
मुनि दीक्षा लेके जंगल में
गुरु बिन सूनो लगे संसार
गुरु समान दाता नहिं
गुरुदेव आये रे बड़े ही सौभाग्य से
गुरुवर थारी परिणति अंतरमयी
जंगल में मुनिराज अहो
धनि मुनि जिन यह
उड़ चला पंछी रे