Text Bhajan
हर पल हर क्षण हर दम
बडे भाग्य से हमको मिला जिन धर्म
भावों में सरलता रहती है
ये धर्म हमारा है हमें
लहराएगा लहराएगा झंडा
श्रीजिनधर्म सदा जयवन्त
आजा अपने धर्म की तू राह में
जय जिनेन्द्र बोलिए
जिनको जिनधर्म सुहाया 2
जिनको जिनधर्म सुहाया
हरो पीर मेरी
हे ज्ञान सिन्धु भगवान
है कितनी मनहार बहती
श्री अरिहंत छवि लखिके
श्री जिनवर पद ध्यावें जे
सीमंधर स्वामी
वन्दों अद्भुत चन्द्रवीर जिन
वर्धमान ललना से
जय जिन वासुपूज्य
वीर प्रभु के ये बोल
शुद्धातम की बात बता दो
म्हारा आदीश्वर जी
मैं करूँ वंदना तेरी
मैं तेरे ढिंग आया रे
मैं ये निर्ग्रंथ प्रतिमा
वीर प्रभु के ये बोल
हरो पीर मेरी
मिलता है सच्चा सुख
मूरत है बनी प्रभु की प्यारी
मन तड़फत प्रभु दरशन
मन भाये चित हुलसाये
मनहर तेरी मूरतियाँ
मनहर मूरत जिनन्द निहार
महाराजा स्वामी
आज मैं महावीर
महावीर आये तेरे द्वार
एक बार आओ जी
मन ज्योत जला देना प्रभु
प्रभुजी मन मंदिर में आओ
भटके हुए राही को
मंगल अरिहंत मंगल
मंगल थाल सजाकर
पार्श्व प्रभुजी पार
पार्श्व प्रभुजी पार लगादो
प्रभु दर्शन कर जीवन की
नेमिप्रभू की श्यामवरन
शौरीपुर वाले
पद्मसद्म
पारस नाम मेरे प्रभु का
पारस प्यारा लागो