भगवन मरुदेवी के Text only और ठौर क्‍यों हेरत प्यारा Text only कर सकल विभाव अभाव Text only क्यों परमादी रे चेतनवा Text only घर आवो सुमति वरनार Text only अपने निजपद को मत खोय Text only अमोलक मनुष जनम प्यारे Text only धर्म के दशलक्षण Text only आयो सहज बसन्त खेलैं Text only खेलौंगी होरी आये Text only चेतन खेलै होरी Text only हो भैया मोरे कहु कैसे सुख Text only हमको कैसैं शिवसुख होई Text only हमारो कारज ऐसे होय Text only हमारो कारज कैसें होय Text only हो भविजन ज्ञान सरोवर सोई Text only सुन चेतन इक बात हमारी Text only सुन चेतन लाड़ले यह चतुराई Text only प्रभुजी प्रभ सुपास Text only सोई ज्ञान सुधारस पीवै Text only सोग न कीजे बावरे मरें Text only हम न किसीके कोई न हमारा Text only सँभाल जगजाल में काल दरहाल Text only सबको एक ही धरम सहाय Text only सबमें हम हममें सब ज्ञान Text only समझत क्यों नहिं वानी Text only सील सदा दिढ़ राखि हिये Text only श्रीजिनधर्म सदा जयवन्त Text only रे मन भज भज दीन दयाल Text only लागा आतमराम सों नेहरा Text only जब बानी खिरी Text only वे कोई निपट अनारी Text only जियको लोभ महा Text only राम सीता संवाद Text only रे जिय क्रोध काहे करै Text only रे जिय जनम लाहो लेह Text only रे जिय भजो आतमदेव Text only रे भाई करुना जान रे Text only मानुषभव पानी दियो जिन Text only मेरे मन कब ह्वै है बैराग Text only राम भरतसों कहैं सुभाइ Text only मगन रहु रे शुद्धातम में Text only मन मेरे राग भाव निवार Text only महावीर जीवाजीव छीर नीर Text only भैया सो आतम जानो रे Text only भोर भयो भज श्रीजिनराज Text only भ्रम्यो जी भ्रम्यो संसार महावन Text only भाई कौन धरम हम पालें Text only भाई जानो पुद्गल न्यारा रे Text only भाई ज्ञान बिना दुख पाया रे Text only
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