Text Bhajan
काया तेरी दुख की ढेरी
आरती श्रीजिनराज तिहारी
एक ब्रह्म तिहुँलोकमँझार
ऐसो सुमिरन कर मेरे भाई
कर मन निज आतम चिंतौन
करौं आरती वर्द्धमान
मंगल आरती आतमराम
मंगल आरती कीजे भोर
रुल्यो चिरकाल
आदिनाथ तारन तरनं
आपा प्रभु जाना मैं जाना
आरति कीजै श्रीमुनिराज की
जाकौं इंद
तेरैं मोह नहीं
देखो नाभिनंदन
फूली बसन्त जहँ
भज रे मन
भज श्रीआदिचरन
आतम जान रे जान रे जान
आतमज्ञान लखैं सुख होई
ऋषभदेव जनम्यौ
अहो भवि प्रानी चेतिये हो
आतम अनुभव कीजिये यह
आतम अनुभव सार हो
अजितनाथ सों मन लावो रे
अब हम आतम को पहिचान्यौ
अब हम नेमिजी की शरन
अरहंत सुमर मन बावरे
हो तुम त्रिभुवन तारी
हो तुम शठ अविचारी जियरा
ज्ञानी ऐसे होली मचाई
मेरो मन ऐसी खेलत
हे जिन तेरो सुजस
हे जिन तेरो सुयश उजागर
हे नर भ्रम नींद क्यों न
हे हितवांछक प्रानी रे
सौ सौ बार हटक नहिं
हमारी वीर हरो भवपीर
सुन जिन बैन श्रवन सुख
सुनि जिन बैन श्रवन सुख
वारी हो बधाई या
शिवपुर की डगर समरस
सब मिल देखो हेली
सांवरिया के नाम जपेतैं
सुधि लीज्यो जी म्हारी
लखो जी या जिय भोरे
लाल कैसे जावोगे असरनसरन
वंदों अद्भुत चन्द्र वीर
वन्दों अद्भुत चन्द्रवीर जिन
वामा घर बजत बधाई