Text Bhajan
जय जिन वासुपूज्य
विषयोंदा मद भानै ऐसा
मोहि तारो जी क्यों ना
मोहिड़ा रे जिय हितकारी
राचि रहो परमाहि तू
मेरी सुध लीजै रिषभस्वाम
वंदों अद्भुत चन्द्र वीर
सब मिल देखो हेली
हमारी वीर हरो भवपीर
मान ले या सिख मोरी
मत कीजो जी यारी यह
मत कीज्यो जी यारी घिन
मत राचो धीधारी भव रंभ
जय शिव कामिनि
जय श्री वीर जिन
जय श्री वीर जिनेन्द्र
सांवरिया के नाम
पास अनादि अविद्या मेरी
प्यारी लागै म्हाने जिन छवि
भविन सरोरूहसूर
भाखूं हित तेरा सुनि हो
वामा घर बजत बधाई
नेमिप्रभू की श्यामवरन
पद्मसद्म
पद्मसद्म
पारस जिन चरन निरख
पारस जिन चरन निरख
पास अनादि अविद्या
निरख सखी ऋषिन को
निरख सुख पायो जिनमुख
नेमिप्रभू की श्यामवरन
लाल कैसे जावोगे
ध्यानकृपान पानि गहि नासी
न मानत यह जिय निपट
अहो नमि जिनप
नाथ मोहि तारत क्यों ना
धनि मुनि जिन यह
धनि मुनि जिनकी लगी
तोहि समझायो सौ सौ
त्रिभुवन आनंदकारी जिन
थारा तो बैनामें सरधान
धन धन साधर्मीजन मिलन
जिनवर आनन भान
तुम सुनियो श्रीजिननाथ
जगदानंदन
जबतैं आनंदजननि दृष्टि
जम आन अचानक दाबेगा
जय जग भरम तिमिर हरन
जय जिन वासुपूज्य
जाऊँ कहाँ तज शरन