Text Bhajan
पारस प्रभु का दर्शन
चवलेश्वर पारसनाथ
ना जिन द्वार आये ना
नाथ तुम्हारी पूजा
धन्य धन्य आज घडी
ध्यान धर ले प्रभू को
तेरी शांत छवि
तेरी सुंदर मूरत
दया करो भगवन् मुझपर
जो पूजा प्रभु की रचाता
तुझे प्रभु वीर कहते हैं
जिनजी के दरश मिले
जिनदेव से कीनी जाने प्रीत
जिनवर आनन भान
जिनवर की भक्ति करेगा
जिनवर की वाणी में म्हारो
जिनवर की होवे जय जयकार
जयवंतो जिनबिम्ब
जिन ध्याना गुण गाना
जिन पूजन कर लो ये ही
चाँदनी फीकी पड़ जाए
जय जय जय जिनवर जी मेरी
जय बोलो त्रिशला के वीर
गंगा कल कल स्वर में
गा रे भैया
गाएँ जी गाएँ आदिनाथ
घडी घडी पल पल
चंद्रानन
चरणों में आया हूं
चवलेश्वर पारसनाथ
एक तुम्हीं आधार हो
एक बार आओ जी महावीरा
करता रहूँ गुणगान
करता हूं तुम्हारा सुमिरन
कुंथुन के प्रतिपाल
आये तेरे द्वार
आज मैं महावीर जी
गाएँ जी गाएँ
म्हारा आदीश्वर
आया तेरे दरबार में
अंतर
जगदानंदन
अशरण जग में चंद्रनाथ जी
आओ दिखायें हम शुभ नगरी
आगया शरण तिहारी आगया
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अंतर में आनंद1
आओ सत्य धरम
इस जग में थोड़े दिन
ओ जी थे झूठ