Text Bhajan
जिया तोहे बार बार
लागे सत्य सुमन
मूंजी धरी रहेली
त्यागो रे भाई यह मान बडा
धर्म मार्दव को सब मिल
मानी थारा मान
मानी मनुआ मद
जियको लोभ महा
जैनी धारियोजी
दस धरम में बस क्षमा
मेरी उत्तम क्षमा न जाय
सबसों छिमा छिमा कर
जिया तूं चेतत क्यों नहिं ज्ञानी
तप बिन नीर न बरसे
तैने दियो नहीं है दान
क्षमाशील सो धर्म
परनारी विष बेल
शील शिरोमणी रतन
थाँकी उत्तम क्षमा पै
काहे पाप करे काहे छल
चार दिनां को जीवन मेलो
तज कपट महा दुखकारी
करल्यो क्षमा धरम न धारण
काहे क्रोध करे
क्रोध कषाय न मैं
जिया तूं चेतत क्यों नहिं ज्ञानी
कपटी नर कोई साँच न बोले
बाहुबली भगवान
सब मिल देखो हेली
हमारी वीर हरो भवपीर
हरो पीर मेरी
महावीर जीवाजीव छीर नीर
जय जिन वासुपूज्य
वंदों अद्भुत चन्द्र वीर
पंखिडा रे उड के आओ
बधाई आज मिल गाओ
बीरा थारी बान परी
जय शिव कामिनि
जय श्री वीर जिन
जय श्री वीर जिनेन्द्र
दुःख मेटो वीर
वामा घर बजत बधाई
सांवरिया के नाम
आज मैं महावीर
आये तेरे द्वार
एक बार आओ जी
कुण्डलपुर वाले
पारस प्रभु को नाऊँ
पार्श्व प्रभुजी पार
पास अनादि अविद्या